27-01-2020 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन “मीठे बच्चे - तुम्हारा एक-एक बोल बहुत मीठा फर्स्टक्लास होना चाहिए, जैसे बाप दु:ख हर्ता, सुख कर्ता है, ऐसे बाप समान सबको सुख दो” प्रश्न: लौकिक मित्र-सम्बन्धियों को ज्ञान देने की युक्ति क्या है? उत्तर: कोई भी मित्र-सम्बन्धी आदि हैं तो उनसे बहुत नम्रता से, प्रेमभाव से मुस्कराते हुए बात करनी चाहिए। समझाना चाहिए यह वही महाभारत लड़ाई है। बाप ने रूद्र ज्ञान यज्ञ रचा है। मैं आपको सत्य कहता हूँ कि भक्ति आदि तो जन्म-जन्मान्तर की, अब ज्ञान शुरू होता है। जब मौका मिले तो बहुत युक्ति से बात करो। कुटुम्ब परिवार में बहुत प्यार से चलो। कभी किसी को दु:ख न दो। गीत:- आखिर वह दिन आया आज.......... ओम् शान्ति। जब कोई गीत बजता है तो बच्चों को अपने अन्दर उसका अर्थ निकालना चाहिए। सेकण्ड में निकल सकता है। यह बेहद के ड्रामा की बहुत बड़ी घड़ी है ना। भक्ति मार्ग में मनुष्य पुकारते भी हैं। जैसे कोर्ट में केस होता है तो कहते हैं कब सुनवाई हो, कब बुलावा हो तो हमारा केस पूरा हो। तो बच्चों का भी केस है, कौन-सा केस? रावण ने तुमको बहुत दु:खी ब...
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