प्रेरणा एक ऐसा शब्द ह जिसकी गहराई इतनी ज्यादा ह की इसको समजना राइटर की सोच को समजना होता ह। हम यहाँ एक शोती सी स्टोरी बताते ह , एक बार बुध कुश काल सन्यास के बाद जब भिक्षा मांगते हुए एक दिन अपने ही घर के दरवाजे पे भिक्षा के लिए खरे हुए और आवाज़ लगाई बिख्शाम देहि>>>>>. तो अन्दर से उनकी पत्नी बाहर आयी तो बुध को देखते हुए बोली , में आपको भिक्षा जरूर दूंगी पर मेरी एक शरत ह। अगर आप उसको पूरा करेंगे तो। बुध बोले बोलो तुम्हारी क्या इच्छा ह। यशोदा बोली ये जो राहुल ह इसको कई वर्ष बीत अपने पापा से दूर हुए अब ये ७ वर्ष का हो चूका ह। तो में चाहती हु की अब इसको अपने बाप का संग मिले।
ये सुनकर भगवन बुध बहुत ही हैरान थे और कुश देर मोअन रहे। उनकी पत्नी को लग रहा था की अब बुध के पास कोई रास्ता नहीं बचा अब वो अवशः ही घर वापिस आ जायेंगे। पर बुध तो समझ चुके थे की यशोदा उनको वापिस से गृहस्त में लाना चाहती ह। पर भगवन को देना होता ह इसी लिए ोमोहोने अपनी पत्नी को बोलै सोच लो जो तुमने माँगा ह वो सही ह। बार बार कहा पर यशोदा बिलो मुझे एहि चाहिए। बुध ने बोलै ठीक अगर तुम्हारी ये इच्छा ह तो ये ही सही.
जैसे ही बुध ने 'तथास्तु 'बोला पास ही खड़ा राहुल बुध का बेटा ये सब सुन्न रहा था। वो उसी समः भाग कर अन्दर गया और रेडी हो कर बाहर आया और बुध के साथ चल दिया। यशोदा देखती रह गयी। मौका हमे भगवन देते ह बार बार प्रेरित भी करते ह की अपने कहे हुए पे पुनर विचार करलो क्योकि एक बार अगर "तथास्तु 'हो गया तो उनका आशीर्वाद वापसी नहीं हो सकता। इसी लिए पहले ही सोच समझ कर मांगना चाहिए।
जब भी कभी जीवन में कुश मांगना हो भगवान से पूर्णता से भरे वाकिया से ही मांगे अधूरा वाकिया न बोले क्योकि बाद में हम फिर कहते ह भगवन अपने जो मैंने माँगा था उस से उल्टा किओ किया। वो कभी कुश उल्टा नहीं करता। हमें ही किसी ने कभी प्रेरित नहीं किया की सही कैसे मांगते ह।
आशा करती हु आप सभी को ये स्टोरी जरूर अच्छी लगी होगी और भगवन बुध की जीवन से प्रेरणा भी मिली होगी की हमे उस से कैसे बात करनी ह। आप सब इसको जरूर अपने जीवन में उत्तारे तो आपको जरूर भगवन से कनेक्शन बनाने में इजी लगेगा.
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