_*30-11-2019 प्रात:मुरलीओम् शान्ति"बापदादा"' मधुबन*_ _*“मीठे बच्चे - बाप आया है तुम बच्चों को भक्ति तू आत्मा से ज्ञानी तू आत्मा बनाने, पतित से पावन बनाने''*_ _*प्रश्नः-*_ ज्ञानवान बच्चे किस चिन्तन में सदा रहते हैं? _*उत्तर:-*_ मैं अविनाशी आत्मा हूँ, यह शरीर विनाशी है। मैंने 84 शरीर धारण किये हैं। अब यह अन्तिम जन्म है। आत्मा कभी छोटी-बड़ी नहीं होती है। शरीर ही छोटा बड़ा होता है। यह आंखें शरीर में हैं लेकिन इनसे देखने वाली मैं आत्मा हूँ। बाबा आत्माओं को ही ज्ञान का तीसरा नेत्र देते हैं। वह भी जब तक शरीर का आधार न लें तब तक पढ़ा नहीं सकते। ऐसा चिन्तन ज्ञानवान बच्चे सदा करते हैं। _*ओम् शान्ति।*_ यह किसने कहा? आत्मा ने। अविनाशी आत्मा ने कहा शरीर द्वारा। शरीर और आत्मा में कितना फर्क है। शरीर 5 तत्व का इतना बड़ा पुतला बन जाता है। भल छोटा भी है तो भी आत्मा से तो जरूर बड़ा है। पहले तो एकदम छोटा पिण्ड होता है, जब थोड़ा बड़ा होता है तब आत्मा प्रवेश करती है। बड़ा होते-होते फिर इतना बड़ा हो जाता है। आत्मा तो चैतन्य है ना। जब तक आत्मा प्रवेश न करे...
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